Sunday 2 June 2013

अमेरिका के अस्पतालों की स्वच्छता पर भारत से रखी जाएगी नज़र


शिकागो (अमेरिका)। यहां एक अस्पताल में काम कर रहे डॉक्टरों ने हाथ धोए की नहीं इस बात पर नजऱ अब भारत से रखी जा रही है। न्यूयॉर्क शहर के पास लॉन्ग आयलैंड स्थित नार्थ शोर यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ने ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू किया है जिससे जब भी कोई इंटेंसिव केयर यूनिट यानि आईसीयू में दाखिल होता है तो उस का वीडियो भारत में एक कंट्रोल रूम में शुरू हो जाता है।

मोशन सेंसर यानि की किसी भी तरह के हलचल से चल पडऩे वाली वाली तकनीक, लाइव तस्वीरें लॉन्ग आइलैंड से भारत भेजती है। भारत में बैठे कर्मी इस बात को गौर से देखते हैं कि आईसीयू में जो भी अन्दर आया है क्या उसने कम से कम पंद्रह सेकंड्स तक अपने हाथ धोये हैं कि नहीं। बीमारी के फैलने में गंदे हाथों का एक बड़ा योगदान रहा है। इतना ही नहीं इसकी वजह से शिकार मरीज़ अक्सर अस्पतालों पर कई बार बड़ा भारी क़ानूनी दावा भी थोप देते हैं। ऐसे कई उदाहरण है अमेरिका में जहां की मरीजों के वकीलों ने करोडों डॉलर्स का भुगतान पाया है।

आए दिन विकसित हो रही इन तकनीकों के बारे में लिखा जाना इसलिए भी ज़रूरी है ताकि भारत के गाँवों में बसे लोगों को इन सबके बारे में पता चल सके। उन्हें यह मालूम होना चाहिए की किस क़दर ना कि सिर्फ  विश्व छोटा बनता जा रहा है बल्कि हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में तकनीकी का कितना दखल है आज के समय में। 
कई लोगों को इस बात से बड़ी आपत्ति हो सकती है कि अब हाथ धोने जैसी आम बात पर भी इस तरह से ध्यान दिया जायेगा। और अगर हाथ न धोया तो लगभग सोलह हज़ार किलोमीटर की दूरी से आपको कोई टोक देगा। किसने हाथ धोया और किसने नहीं इस बात की हर महीने एक रिपोर्ट भी निकल सकती है जिसको लेकर ऐसे अस्पताल के कर्मियों को सज़ा हो सकती है और ऐसा भी संभव है कि उसे अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़े। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डीज़ीस कंट्रोल का यह कहना है कि हर साल इन्फेक्शन के कारण फैलने वाली बिमारियों से जूझने के लिए इस मुल्क में सालाना करीब 16 $खरब से ज्यादा रुपए खर्च किए जाते हैं। उसको ध्यान में रखते हुए अस्पतालों को शायद यही सस्ता पड़े की भारत में किसी कंट्रोल रूम में बैठा कोई नौजवान भारतीय यह दिन रात देखता रहे कि किसने हाथ नहीं धोया। 

ऐसा माना जाता है कि बिन कहे या बिन टोके शायद तीस फीसदी कर्मचारी ही अपना हाथ धोते हैं। अमेरिका के एक प्रतिष्ठिïत अ$खबार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अस्पतालों के मालिकों ने अब यह हाथ कैसे और क्यों धोने चाहिए उसके लिए कोच भी तैनात किये हैं। कुछ अस्पतालों ने तो इस आदत को प्रोत्साहित करने के लिए मुफ्त में पिज़्ज़ा और कॉ$फी का इनाम देने का फैसला भी किया है।

यहां तक बताया जाता है कि हाथ धोते समय अगर कोई मन में या खुलेआम 'हैप्पी बर्थडे टू यू' पूरा गाए तो पूरे पन्द्रह सेकंड्स तक गाना चलता है। शायद इस बात की शुरुआत भारत के अस्पतालों में भी करनी चाहिए। बस 'हैप्पी बर्थडे टू यू' के बजाए भारत के डॉक्टर्स और नर्सेज शायद 'बार-बार दिन ये आए बार-बार दिल ये गाये तुम जियो हजारों साल यह मेरी है आरजू' गा सकते हैं। वो भी करीब पंद्रह सेकंड्स में ही गाया जा सकता है।
मुझे लगता है भारत में एक सस्ता तरीका भी है। लोगों की चुगली करने की आदत को कुछ इस तरह से बढ़ाया जाये जिस से लोग ऐसे लोंगों की चुगली करें जिन्होंने हाथ नहीं धोए हों।

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