Monday 13 May 2013

इन गाँवों को देखकर मुंह से 'वाओÓ न निकले तो कहना


धनंजय  कुमार 

नई दिल्ली। किसी भव्य चीज को देखकर शहर के कुलीन एवं हाइ-फ ाइ लोगों के मुंह से बरबस निकल जाने वाला विस्मय बोधक शब्द 'वाओ' अभी बिहार के एक बेहद पिछड़े जिले के गाँवों में क्रेज बना हुआ है। हर किसी की जुबान पर है 'वाओ' 'वाओ'। दरअसल 'वाओ' नाम उस आधुनिक शौचालय को दिया गया है जो खुले में शौच को रोकने के लिए इन गाँवों में बनाया जा रहा है। सिर्फ यही नहीं बल्कि अगले एक डेढ़ साल में जिले के सभी गाँवों का जीवन स्तर इस कदर सुधर जाएगा कि पूरा देश ही कह उठेगा 'वाओ'!  

झिटकही, बहुआरा, हरकरवा, पिपरी, परसौनी, कटैया, बिसाही, भलुआही, फु लकहा, डुमरी, ऐसे गुमनाम गाँव पूरे देश के लिए नजीर बन जाएंगे। ये बिहार में सबसे उपेक्षित रहे नेपाल की सीमा पर स्थित शिवहर जिले के उन 240 गाँवों में शुमार हैं जिनकी तकदीर इस कदर बदलने की राह पर चल पड़ी है कि वह दिन दूर नहीं जब पूरे देश के गाँव उन पर रश्क कर उठेंगे। अब तक खुले में शौच की वजह से पूरी तरह नरक में तब्दील ये सभी 240 गाँव चमन के पर्याय बनने वाले हैं। 'वाटर फॉर पीपुल' नामक अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन ने इस जिले को गोद लिया है। पिछले सप्ताह दिल्ली में बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई और शुद्ध पेय जल को लेकर की गई एक स्टडी को जारी करने के मौके पर मौजूद 'वाटर फॉर पीपुल' के डेवेलपमेंट मैनेजर सत्य प्रकाश चौबे कहते हैं ''बिहार में ऐसा नरकीय जिला और कहीं नहीं होगा। सड़कों पर, सड़कों के किनारे, नदी के किनारे, खेतों में किए गए शौचों की वजह से चारो तरफ गंदगी की स्थिति है। इसकी वजह से वहां की जमीन के अंदर का पानी भी बुरी तरह से प्रदूषित हो चुका है। नतीजतन, पेचिश, डायरिया, हेपेटाइटिस, टायफायड के मामलों ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। लेकिन 2015 के आते-आते ये स्थिति पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।" चौबे कहते हैं, ''सड़क के किनारे बसे इस जिले के महमादपुर कटसारी पंचायत के गाँव डुमरी में अभी-अभी एक 'वाओ' शौचालय बन कर तैयार क्या हुआ, वह लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है। हम शिवहर को देश का वैसा पहला जिला बनाने की राह पर हैं जहां शत प्रतिशत घरों में शौचायल और शुद्ध पेय की व्यवस्था होगी।''  
  
पूरे बिहार के गाँवों में पीने का स्वच्छ पानी और आधुनिक शौचालय मुहैया कराने की मुहिम शुरु करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था पॉप्यूलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल (पीसीआई) ने पूरे बिहार में जो यह स्टडी कराई है उसके अनुसार बिहार के गाँवों की 70 प्रतिशत आबादी खुले में शौच करने एवं प्रदूषित पानी पीने को अभिशप्त है। इस स्थिति को खत्म करने की मुहिम में पीसीआई के साथ वैश्विक रणनीतिक फर्म 'मोनिटर डिल्वाइटे' और वाटर फॉर पीपुल संस्था भी शामिल है। 

'मोनिटर डिल्वाइटे'की भारतीय शाखा के प्रमुख आशिष करमचंदानी कहते हैं, ''हमने बिहार के गाँवों को बाजार आधारित निदान मुहैया कराने की बेहद महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इस मिशन में गाँव के लोग, सरकार, गैर-सरकारी संस्थाएं सभी भागीदार हैं। इस मामले में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन बिहार पर जबर्दस्त मेहरबान है। इस फाउंडेशन ने मानो बिहार के गाँवों को चमन बनाने की ठान ली है। यह बिहार के गाँवों के लिए सौभाग्य की बात है।'' 

हमने अध्ययन में यह भी पाया है कि गाँवों के लोग भी खुले शौच से उत्पन्न नारकीय स्थिति से उबरने को बेताब हैं। शौचालय के लिए वे अपनी अंटी ढीली करने को भी तैयार हैं। वैसे लोग जो अभी पैसे नहीं दे सकते, उनके लिए बाद में देने की व्यवस्था भी है। खुले में शौच करना महिलाओं के लिए भी लगातार असुरक्षित होता जा रहा है। इसलिए भी गाँव का हर परिवार अपने घर में शौचालय चाहता है। सरकार भी सब्सिडी देने को तैयार है, इसलिए बिहार के गाँव अब इस स्थिति से मुक्त होने की राह पर चल पड़े हैं। 

वाटर फॉर पीपुल के चौबे कहते हैं, ''उत्तर प्रदेश में भी स्थिति बिहार से बहुत ज्यादा बेहतर नहीं है। बिहार के सफल प्रयोग के बाद उत्तर प्रदेश भी हमारे एजेंडे में शामिल है। पश्चिम बंगाल में खुले में शौच के खिलाफ एक सामाजिक दबाव भी काम करता है। पश्चिम बंगाल के गाँवों में लोग शौचालय शेयर करते हैं, जो अनुकरणीय है।'' जब देश पर अंग्रेजों का शासन था तो अल्ल सुबह चलती ट्रेन से खुले में लोगों को शौच करते हुए देख कर एक अंग्रेज के मुंह से बरबस निकल पड़ा था, 'इंडिया इज ए वास्ट लेटरीन '(भारत एक विशाल शौचालय है)। अभी भी बिहार और उत्तर प्रदेश होकर सुबह ट्रेन से कोई अंग्रेज गुजरे तो यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है कि वह ऐसी टिप्पणी फिर नहीं करेगा। बहरहाल, अगर बिहार के हर गाँव में सफाई की ऐसी ही दुरुस्त व्यवस्था हो जाए तो डॉक्टर मानते हैं कि उनकी बीमारी की आधी समस्या वैसे ही हल हो जाएगी। गाँवों के सशक्तिकरण में एक अदद शौचालय पहली शर्त है।

No comments:

Post a Comment