Wednesday 8 May 2013

अगर मुस्लिम हैं तो अमेरिका में कड़ी जांच को रहें तैयार


शिकागो (अमेरिका)। आप के नाम में अगर 'खान' जुड़ा है तो यह संभव है कि अमेरिका के एयरपोर्ट में आप की सुरक्षा जांच थोड़ी अधिक हो। उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री आज़म खान, जो हाल ही में अपने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के संग अमेरिका के दौरे पर आये थे, को इस तथ्य का भलीभांति परिचय हुआ।

आज़म खान का यह कहना है कि अमेरिका के सुरक्षाकर्मियों ने बोस्टन के लोगन एयरपोर्ट पर उनकी जिस कदर जांच की उसे किसी मेहमान की शान में एक गुस्ताख़ी ही माना जाना चाहिए। अमेरिका के सुरक्षा विभाग का यह कहना है कि उनके कर्मचारियों ने जो भी किया बस अपनी जि़म्मेदारी निभाते हुए किया। ऐसा कोई बर्ताव नहीं हुआ जिससे कि आज़म  खान साहब का किसी भी तरह का अपमान हुआ हो। 

यह हक़ीक़त है कि मुसलमान नाम वाले लोगों को अमेरिका में वाकई ज्य़ादा जांच-पड़ताल का सामना करना पड़ता है। इस बात को लेकर भारत से आए यात्रियों को अक्सर परेशानी होती है। अब यह कहना मुश्किल है कि घटनाक्रम था क्या? बात यहां तक पहुंच गई कि आज़म खान ने इस किस्से को भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के द्वारा रची गयी एक साजि़श करार दिया। भारत सरकार ने अपनी नाखुशी अमेरिका की सरकार  से भी जताई और ऐसा भी सुनने में  आया कि दोनों देशों के रिश्तों में छोटी सी दरार पड़ी। 

आज़म का यह भी कहना था कि उनको सिर्फ  इस लिए रोका गया क्योंकि वो एक मुसलमान हैं। ये दावा शायद इतना भी बेहूदा न हो जितना कि सुनने में लगे। वो इसलिए क्योंकि अमेरिका की सुरक्षा नीतियों में यात्रियों के नाम और मज़हब पर विशेष ध्यान दिया जाता है। दुर्भाग्यवश आज़म खान और अखिलेश यादव का दौरा बोस्टन में हुए आतंकवादी बम विस्फोट के कुछ ही दिनों के बाद हुआ। उस वक्त माहौल वैसे भी शंका-कुशंका और दहशत का बना हुआ था।

 यहां के सुरक्षा विभाग के पक्ष में इतना कहा जा सकता है कि वो अक्सर ये नहीं देखते कि किस व्यक्ति  की जांच कर रहे हैं। इस मुल्क के  नामी नेता भी कभी-कभी सुरक्षाकर्मियों की पल्ले पड़ जाते हैं। रेशियल प्रोफाइलिंग यानि कि व्यक्ति विशेष के नाम, मज़हब, रंग वगैरा के आधार पर अधिक जांच करना एक बड़ा चर्चित विषय रहा है। आज़म साहब को दस-पंद्रह मिनट ही रोका गया था जिसके पीछे रेशिअल प्रोफाईलिंग का होना असंभव बात नहीं है, लेकिन यह भी सच है कि जिस हद तक भारत के राजनेताओं को सहूलियतें मिलती हैं, जिसे वो अपना अधिकार समझते हैं इतना अमेरिका में नहीं देखा जाता। शायद यही वजह हैं कि सुरक्षा विभाग को इस बात का खय़ाल रखने की  आदत नहीं है।

हां, इतना तो हो ही सकता है कि जो बाहर से विशेष मेहमान आते हैं, जिनके पास विशेष तरह का पासपोर्ट (डिप्लोमेटिक पासपोर्ट) होता है उनके साथ इस तरह का व्यवहार न हो। साथ-साथ इतना भी हो सकता है कि विशेष मेहमान को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि हर छोटी-छोटी अड़चनों को बड़ा भारी स्वरूप न दे दें।

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