Monday 27 May 2013

2020 तक 13 फीसदी लोगों को लील जाएगी तम्बाकू


विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तत्बाकू के प्रयोग के कारण दुनिया भर में 54 लाख लोग प्रति वर्ष अपनी जान गंवाते है। इनमें से 9 लाख मौतें तो केवल भारत में ही होती है। प्रति दिन हमारे देश के 2500 व्यक्ति तम्बाकू की वजह से मृत्यु का शिकार होते हैं। मुंह के कैंसर के सबसे अधिक रोगी भारत में पाये जाते हैं तथा 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर तम्बाकू जनित होता है। सुश्री रेनू मिश्रा अभिनव भारत फ ाउंडेशन की अध्यक्ष हैं। वो पिछले 10 वर्षों से तम्बाकू विरोधी अभियान से जुड़ी हैं । वो ऐसे युवाओं को जागरूक भी कर रही हैं            
 जो नशे के जाल में फं स चुके हैं। विश्व तम्बाकू दिवस के मौके पर उनसे खास बातचीत की गॉव कनेक्शन के संवादादाता जितेन्द्र द्विवेदी ने-

सवाल: तम्बाकू सेवन का स्वास्थ्य पर किस प्रकार प्रभाव पड़ रहा है।
जवाब: देखिये इसका स्वास्थ्य पर प्रभाव कई तरह से पड़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तत्बाकू के प्रयोग के कारण दुनिया भर में 54 लाख लोग प्रति वर्ष अपनी जान गंवाते है। इनमें से 9 लाख मौते तो केवल भारत में ही होती है। प्रति दिन हमारे देश के 2500 व्यक्ति तम्बाकू की वजह से मृत्यु का शिकार होते हैं। मुंह के कैंसर के सबसे अधिक रोगी भारत में पाये जाते हैं तथा 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर तम्बाकू जनित होता है। अनुमान है कि साल  2020 तक 13 प्रतिशत मौतों का जिम्मेदार तम्बाकू ही होगा।

सवाल: मतलब ये कि स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च में भी तम्बाकू से होने वाले रोगों की बड़ी भागीदारी है?
जवाब: बिल्कु ल। साल 2006 के विश्व युवा तम्बाकू सर्वेक्षण के अनुसार प्रतिदिन 5500 भारतीय युवक धूम्रपान करना शुरू करते हैं। तम्बाकू जनित रोगों का स्वास्थ्य व्यय, तम्बाकू से होने वाली आय से कहीं अधिक है। एक नए अध्ययन के अनुसार भारत में सिगरेट और बीड़ी पीने से होने वाली बीमारियों का चिकित्सा व्यय 4535 करोड़ रूपये है, और गुटका, जर्दा, खैनी आदि धुंआ रहित तम्बाकू पदार्थो के लिए यह व्यय 1425 करोड़ रूपये ऑका गया है।

सवाल: भारतीय वयस्कों में तम्बाकू सेवन का प्रचलन किस प्रकार का है।
जवाब: भारत में तम्बाकू सेवन काफ ी प्रचलित है। 57 प्रतिशत पुरूष तथा 11 प्रतिशत महिलाए तम्बाकू का किसी न किसी रूप में प्रयोग करते हैं। अधिकतर महिलाएं धूम्रपान की तुलना में चबाने वाले तम्बाकू का प्रयोग अधिक करती हैं। तम्बाकू का सेवन शहरी महिलाओं एवं पुरूषों की तुलना में ग्रामीण महिलाओं एवं पुरूषों में अधिक प्रचलित है। 35 प्रतिशत ग्रामीण जो कि 15-49 वर्ष की आयु के बीच में है, सिगरेट या बीड़ी का सेवन करते है। इसकी तुलना में 29 प्रतिशत शहरी पुरूष सिगरेट या बीड़ी का सेवन करते है। उत्तरी-पूर्वी क्षेत्रों में तम्बाकू का प्रचलन अधिक है। कुछ राज्यों में इसका प्रचलन 60 प्रतिशत से अधिक है।

सवाल: भारतीय बच्चों में तम्बाकू सेवन का प्रचलन किस प्रकार है।
जवाब: 36.9 बच्चे धूम्रपान का सेवन 10 वर्ष की आयु से पहले शुरू कर देते हैं, जिनमें 55.1 प्रतिशत लड़के तथा 31.1 प्रतिशत लड़कियां हैं। 4.2 प्रतिशत विद्यार्थी आजकल सिगरेट का सेवन कर रहे हैं। यह दर लड़कों में लड़कियों की तुलना अधिक है। आजकल 11.9 प्रतिशत विद्यार्थी अन्य तम्बाकू पदार्थो का सेवन करते हैं।  सिगरेट का सेवन भारत के दक्षिण, उत्तर-पूर्वी एवं मध्य क्षेत्रों में अधिक प्रचलित है। इसकी दर लगभग 12 प्रतिशत है। सार्वजनिक स्थानों पर निष्क्रिय धूम्रपान का प्रभाव 40.3 प्रतिशत है।

सवाल:  विश्व में तम्बाकू सेवन से होने वाली क्या हानियां हैं ?
जवाब: प्रतिवर्ष विश्व में 54 लाख लोगों की मृत्यु तम्बाकू सेवन से होने वाली बीमारियों जैसे फेफ ड़ों के कैंसर, ह्दय रोग तथा अन्य बीमारियों से होती है। दुर्भाग्यवश 80 प्रतिशत से अधिक मृत्यु विकासशील देशों में होती हैं। प्रत्येक दो व्यक्ति जो तम्बाकू सेवन करते हैं, उनमें से एक की मृत्यु होती है। यदि शीध्र कदम न उठाए गए तो - वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 1 करोड़ लोगों की मृत्यु तम्बाकू सेवन के कारण होगी, जिसमें 100 करोड़ की मृत्यु इस सदी में होगी।  वर्ष 2030 तक 80 प्रतिशत से भी अधिक तम्बाकू सेवन से होने वाली मृत्यु निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले देशों में होंगी । ये अनुमान लगाया गया है कि 21वीं शताब्दी में 100 करोड़ मौतें तम्बाकू सेवन के कारण होंगी। विश्व में होने वाली 8 में से 6 मृत्यु तम्बाकू सेवन से होती हैं।

सवाल: भारत में तम्बाकू सेवन से होने वाली क्या हानियां हैं?
जवाब: भारत में प्रतिवर्ष 9 लाख भारतीयों की मृत्यु तम्बाकू सेवन से होने वाली बीमारियों से होती हैं। प्रतिदिन 2200 से अधिक भारतीयों की मृत्यु तम्बाकू सेवन के कारण होती है। प्रतिदिन 5500 भारतीय युवक धूम्रपान करना शुरू करते हैं। विश्व में मुॅह के कैंसर के रोगियों की संख्या सर्वाधिक भारत में हैं। इनमें से 90 प्रतिशत मुह के कैंसर तम्बाकू से होते है। भारत में 40 प्रतिशत कैंसर तम्बाकू उपयोग के कारण होते हैं।

सवाल: तम्बाकू सेवन रोकने के लिए नीतिगत स्तर पर किस प्रकार के बदलाव की जरूरत हैं?
 जवाब: सभी तम्बाकू पैकेटों पर वर्तमान चेतावनियों को प्रभावशाली तरीके से पेश करना चाहिये। इन चेतावनियों का क्षेत्र परीक्षण होना चाहिए, ताकि समाज के सभी वर्गो के बीच उनका मूल्यांकन किया जा सके कि वे प्रभावपूर्ण तरीके से, तम्बाकू प्रयोग के वास्तविक स्वास्थ्य कुप्रभावों को बताने में कामयाब हैं कि नहीं। गैर-सरकारी संस्थाओं को अपने नेटवर्क के साथ मिलकर भारतीय तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम को लागू तथा कार्यान्वित करने के लिए एक जुट होकर काम करना। उपभोक्ता संस्थाए स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हंै । मीडिया भी जनसाधारण, नीतियां बनाने वालों तथा नेताओं को जागरूक करने के लिए अभियान शुरू कर सकता है।

निष्क्रिय धूम्रपान भी है बीमारियों का घर

निष्क्रिय धूम्रपान में 4000 विभिन्न प्रकार के रसायन होते हैं जिनमें से 50 कैंसर का कारण बनते हंै। धूम्रपान के दौरान जो धुआं शरीर में जाता है, उसकी तुलना में निष्क्रिय धूम्रपान में निकोटीन तथा टार की मात्रा दुगनी तथा कार्बन मोनोक्साइड की मात्रा 5 गुने से अधिक होती है जो कि खून में ऑक्सीजन की मात्रा को कम करता है।

   8 से 20 मिनट के निष्क्रिय धूम्रपान का प्रभाव दिल तथा स्ट्रोक जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। मतलब ये कि इससे ह्दय की धड़कन में बढोत्तरी, ह्दय में आक्सीजन की मात्रा में कमी एवं खून की नलिकाओं में सिकुडऩ पैदा होती है और इससे रक्तचाप बढ़ता है और ह्दय को ज्यादा कार्य करना पड़ता है।भारतवासी निष्क्रिय धूम्रपान का शिकार बीड़ी, सिगरेट, सिगार, हुक्का, चुरूट तथा सभी प्रकार के धुएॅ वाले तम्बाकू पदार्थो के कारण होते है।

  ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे के अनुसार 36.4 प्रतिशत बच्चे घर में निष्क्रिय धूम्रपान के शिकार होते है तथा 48.7 प्रतिशत बच्चे घर के बाहर इसका शिकार होते हैं। धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति जो निष्क्रिय धूम्रपान का शिकार होते हैं को ह्दय रोग का खतरा धूम्रपान न करने वाले जो निष्क्रिय धूम्रपान से प्रभावित का शिकार नहीं होते हैं कि तुलना में 25 प्रतिशत होता है।

   विश्वभर में 70 करोड़ बच्चों को जबरदस्ती निष्क्रिय धूम्रपान का शिकार होना पड़ता है। जो व्यस्क एवं बच्चे धूम्रपान नहीं करते, उनमें निष्क्रिय धूम्रपान के प्रभाव से मृत्यु तथा बीमारियां होने का खतरा होता है। इसके कारण फेफड़ों का कैंसर, दिल की बीमारियां, ब्रानकाइटिस, दमा(ज्यादातर बच्चों में), अचानक शिशुओं की मृत्यु, कम वजन के शिशुओं का जन्म (गर्भवती महिला जो निष्क्रिय धूम्रपान का शिकार होती हैं)।

   निष्क्रिय धूम्रपान के इन प्रभावों को कम करने के लिए व्यापक धूम्रपान-निषेध कानून (धूम्रपान पर प्रतिबन्ध) है, जिसके अनुसार सभी सार्वजनिक स्थानों एवं कार्यस्थलों पर धूम्रपान निषेध है।

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