Tuesday 16 April 2013

हिन्दू मंदिर में मुस्लिम महिला की पूजा


रश्मि रवीजा

अहमदाबाद। अहमदाबाद से चालीस किलोमीटर की दूरी पर 'झूलासन' नाम का एक गाँव है।  ये गाँव अंतिरक्ष यात्री सुनीता विलियम्स के पिताजी का पैतृक गाँव है। इस पहचान के अलावा इस गाँव की एक और खासियत है। यहाँ पर एक मंदिर है और शायद यह एक अकेला हिन्दू मंदिर है, जिसमें मुस्लिम महिला की पूजा की जाती है।

कहा जाता है कि 250 साल पहले 'डोला' नाम की एक मुस्लिम महिला ने उपद्रवियों से अपने गाँव को बचाने के लिए उनसे बहुत ही वीरतापूर्वक लड़ाई की और अपने गाँव की रक्षा करते हुए अपनी जान दे दी।  उनका शरीर एक  फू ल में परिवर्तित हो गया और उस फू ल के ऊपर ही इस मंदिर का निर्माण किया गया।

अभी हाल में ही इस गाँव के अमीर निवासियों ने इस मंदिर को और भी भव्य बनाने के लिए चार करोड़ रुपये की राशि इकट्ठा की है। झूलासन केलवानी मंडल के अध्यक्ष रजनीश वाघेला बताते हैं कि इस मंदिर में कोई मूर्ति या कोई तस्वीर नहीं है। एक पत्थर का एक यंत्र (जो ताबीज़ हो सकता है) है और उसके ऊपर साड़ी डालकर पूजा की जाती है। इस मंदिर को 'डॉलर माता' का मंदिर भी कहा जाता है क्योंकि 7000 की जनसंख्या वाले इस गाँव के 1500 निवासी अब अमेरिका के नागरिक हैं। सुनीता विलियम्स जब अन्तरिक्ष यात्रा पर गयीं तो उनकी सुरक्षित वापसी के लिए इस मंदिर में एक अखंड ज्योति जलाई गयी जो चार महीने तक लगातार जलती रही। धर्म के नाम पर जितनी राजनीति होती है और जितनी बहसें, जितने मनमुटाव, ऐसे में एक गाँव में सीधे-सच्चे मन वाले लोगों ने बिना किसी का धर्म देखे उसके कर्मों को सराहा है। उसकी वीरता के लिए उसके बलिदान को याद करते हुए उसकी याद में एक मंदिर ही बना लिया है और अपनी कृतज्ञता उसकी पूजा करके व्यक्त करते हैं।

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