Tuesday 23 April 2013

मोबाइल तो खरीद लिया, चार्ज कराने जाते हैं 6 किलोमीटर दूर


पंकज कुमार 

पीतानपुरवा (कानपुर)। गाँव-गाँव में भले ही संचार क्रांति  की बयार बह रही हो, लगातार गाँव के लोगों के हाथों में मोबाइल बढ़ रहे हों, लेकि न उनका झंझट कम होते नहीं दिख रहे। 

कानपुर से 60 किलोमीटर दूर पीतानपुरवा गाँव के विसर्जन यादव (37) ने मोबाइल तो खरीद लिया, लेकिन उसे चार्ज करने के लिए बिजली नहीं है। वह कहते हैं, "हमारे गाँव में लोगों ने मोबाइल तो खरीद लिया लेकिन गाँव में मोबाइल चार्ज करने के लिए बिजली नहीं मिलती। हम लोग गाँव से छह किलोमीटर दूर असालतगंज अपने मोबाइल चार्ज कराने जाते हैं।" हालांकि विसर्जन यादव ने दूसरे गाँव के लोगों की समस्याओं को कम करने के लिए  एक बड़ी बैटरी खरीदी है, जिसे चार्ज कराने के बदले में 25 रुपये देने होते हैं। फिर उसी बैटरी से दूसरों के मोबाइल चार्ज करते हैं। 

पीतमपुरवा गाँव के दोनों तरफ  से 11,000 वोल्ट के हाइटेंशन तार गुजरते है, लेकिन इस गाँव के अंदर आज भी बिजली का इंतजार है। गाँव के ही 42 वर्षीय अलखराम कहते हैं, "लाइट ना होने के कारण  बच्चे ठीक से पढ़ भी नहीं पाते है। बिजली होती तो शाम को वो पढ़ भी सकते थे। कोटे से 1 लीटर तेल मिलता है मुश्किल से ही गुजारा हो पाता है।"

रसूलाबाद विधानसभा क्षेत्र में स्थित पीतमपुरवा अकेला ऐसा गाँव नहीं है जहां के लोग बिजली न मिलने से किसी दूसरे गाँव मोबाइल चार्ज कराने को जाते हैं। पास के ही गाँव मधुनीमादा, गंभीरा, परसौरा, जय सिंह नेवादा, कुशलपुरवा जैसे बहुत से गाँव हैं जहां ऐसे ही हालात हैं।

वर्तमान सपा सरकार में टेक्स्टटाइल मंत्री शिव कुमार बेरिया इसी क्षेत्र से हैं। गाँववालों का कहना है कि चुनाव से पहले उन्होंने भी गाँव में बिजली लाने का वादा किया था लेकिन अब कोरे आश्वासन मिलते हैं। 

ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक भारत के करीब 80 हज़ार गाँवों में आज भी बिजली नहीं पहुंची है। केवल उत्तर प्रदेश में ही ऐसे 3,000 गाँव है जहां अभी तक बिजली का एक भी खंभा नहीं गड़ा है। भारत सरकार ने गाँवों में बिजली पहुंचाने के लिए साल 2005 के अप्रैल महीने में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना शुरू की थी। इसके तहत उन गाँवों में बिजली पहुंचाने का काम किया जा रहा है जहां आज भी बिजली नहीं पहुंची है।

पीतमपुरवा के पड़ोस के गाँव कुशलपुरवा के ग्राम प्रधान मनोज यादव कहते हैं, "हमने 10-20 रुपये चंदा इकट्ठा करके अधिकारियों को पत्र भी लिखा, रसूलाबाद से कानपुर तक के चक्कर भी लगाए, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। आज गाँव के अधिकतर लोग कनेक्शन लेने के लिए भी तैयार हैं लेकिन अधिकारी सिर्फ  वादा करते है, हमने मंत्री जी को भी पत्र लिखा, उन्होंने आश्वासन ही दिया, आज भी बिजली का इन्तजार है।" 

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