Monday 21 January 2013

पति के ज़ुल्मों से परेशान हो सीमा ने छोड़ा घर, बेटे को बनाया नौ.सैनिक


घरेलू हिंसा से पीडि़तों की करती हैं मदद

भाष्कर त्रिपाठी

पालापुर ;कानपुरए उत्तर प्रदेशद्ध। मारपीट करने वाले पति का जब घर छोड़ा तो एक छोटा सा बच्चा सीमा पांडेय की गोद में था। क्या करना है नहीं पता था पर ठान लिया था कि दोबारा पति के घर की चौखट में पांव नहीं रखेंगी। सीमा ने तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए बच्चे को शान से पाला.पोसा और उसे नौ.सैनिक बनाया।

कानपुर के सरसौल ब्लॉक के पालापुर गाँव में रहने वाली सीमा पांडेय की शादी कानपुर शहर के एक लड़के से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही उनका पति मारपीट करने लगा जिसके बाद सीमा ने साल 1992 में ही अपने पति का घर छोड़ दिया। ष्मैंने बहुत बार अपने पति को माफ  किया क्योंकि मन में एक ही खयाल था कि परिवार बना रहे।ष्ए सीमा बताती हैं। उन्होंने अपने बच्चे प्रियम को अकेले ही पाला। आज प्रियम अपनी मां से हज़ारों किलोमीटर दूर उड़ीसा के विशाखापट्टनम में भारतीय नौ.सेना में प्रशिक्षण ले रहा है। 
सीमा भारत की उन 40 प्रतिशत शादीशुदा महिलाओं में से एक हैं जो हर साल घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। जिनमें से ज़्यादातर महिलाएं ग्रामीण क्षेत्रों की होती हैं।

ष्मेरे पति आए दिन शराब पीकर आते थे। कुुछ भी बात करने जाओ तो कहते थे एक गिलास पी लूं तब बात करूंगा। कभी समझाने की कोशिश करो तो मारने लगतेए कई बार तो हाथ तोड़ देते थे। एक बार तो बात इतनी बढ़ गई कि मेरे ऊपर मिट्टी का तेल डालकर जलाने की कोशिश की उस वक्त मेरा बच्चा मेरे पेट में था।ष्ए सीमा कहती हैं। 

कुछ दिन ही बीते होंगेए उनके पति ने एक बार फि र वही हरकत कीए ष्एक दिन वो हमेशा की तरह पीकर आये थे और मारपीट करने लगे। लेकिन इस बार तो उन्होंने हद पार कर दीए मेरे एक साल के बच्चे को पटक दिया। उस दिन मैं समझ गई थी कि यह आदमी मुझे और मेरे बच्चे को एक अच्छी जि़ंदगी नहीं दे सकताए इसलिए मैंने उसी समय अपने पति का घर छोड़ दिया और फि र पलट कर कभी वापस नहीं गई।ष्ए सीमा भावुक होकर कहती हैं। 

ष्गाँव में रहने वाली औरत अपने पति की मारपीट को परंपरा मानती है। उनके लिए ससुराल और मायके के बीच की दूरी बहुत ज़्यादा होती है। मायके वाले समाज के डर से अपनी बेटी को अपने घर में रखने से कतराते हैं।ष्ए सीमा कहती हैं।  लेकिन सीमा के घरवालों ने उनका साथ नहीं छोड़ा। सीमा ने अपने बेटे की परवरिश उसके ननिहाल में की। ष्मरे पति रिवाल्वर और गुंडे लेकर आते बच्चे को ले जातेे। हम डरे रहते थेए घर के बाहर से किसी गाड़ी की आवाज़ आते ही प्रियम को छुपा देते। वह बताती हैं। प्रियम नाम रखा था सीमा नेए अपने बच्चे का क्योंकि वह उन्हें सबसे प्रिय था।  

देश में हर साल हजारों महिलाएं सीमा की तरह ही घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। केंद्र सरकार की संस्था नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक देश में साल 2012 में 9ए431 घरेलू हिंसा की वारदातें सामने आईं। लेकिन इनमें से कितनी महिलाएं दोबारा अपनी जि़ंदगी नए सिरे से शुरू कर पाईं इसका लेखा.जोखा नहीं मिलता। 

पति का घर छोडऩे के बाद के शुरुआती दिनों के बारे में बताते हुए सीमा कहती हैंए ष्कुछ समझ नहीं आ रहा था कहां जाऊंए क्या करूंघ् पैसे जोडऩे के लिए ट्यूशन पढऩा शुरू कियाए तब सिर्फ  पांच रुपए मिलते थे महीने के। एक स्कूल में भी पढ़ाती थी बच्चों को तो 40 रुपए वहां से मिलते थे। उन्हीं से मैंने बेटे को भी पढ़ाया और ख़ुद की भी पढ़ाई   पूरी की। जिस वक्त मुझे अपने बच्चे को गोद में लेकर बैठना चाहिए था उस समय मुझे काम करने जाना पड़ता था पर मेरे बच्चेे ने भी मेरा बहुत साथ दिया। उसने छोटी उम्र से ही कठिनाइयों को समझा।

ष्नौ.सैनिक बनना प्रियम का सपना था या फि र यह सपना    आपने उसके लिए देखा थाघ्ष् इस सवाल के जवाब में सीमा कहती हैंए ष्उसको बचपन से ही बहुत   शौक़ था पानी  के जहाज देखने   का। वह टीवी पर भी यही सब देखता था और  उसने हाईस्कूल के बाद खुद से ही परीक्षाओं में बैठना शुरू कर दिया था।ष्   
पति का घर छोड़े अब कई साल बीत चुके हैं। आज सीमा ने अपनी एक अलग ही दुनिया बसा ली है। वह कई गैर सरकारी संगठनों से जुड़कर घरेलू हिंसा से पीडि़त महिलाओं की मदद करती हैं उन्हें आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित करती हैं। सीमा ने अपने बेटे को जिस बहादुरी और शान से पाला वह बहुत सी महिलाओं को हौसला देने वाला है। महिलाओं के साथ बदसुलूकी के आए दिन सामने आते मामलों के बार में सीमा कहती हैंए ष्एक लड़के के जीवन में सबसे पहली स्त्री उसकी मां होती है। मैंने अपने बच्चे को महिलाओं का सम्मान करना सिखाया हैए हर मां यही करती है। लेकिन उसके बाद भी जो उल्टी.सीधी हरकतें करते हैं वह सब मानसिक रोगी होते हैं।

सीमा की छोटी सी दुनिया में अब उनका बेटा ही उनके लिए सब कुछ है। अपने बेटे की उपलब्धि के बारे में वह कहती हैंए उसे बचपन में नौ.सैनिकों की सफेद डे्रस बहुत पसंद थी। अभी कुछ दिन पहले नए साल पर उसी सफेद डे्रस में घर आया था।


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