Monday 3 June 2013

घटिया कीटनाशक बेचने पर दो साल की जेल

अमूल्य रस्तोगी

लखनऊ। अगर कोई दुकानदार घटिया कीटनाशक बेचते हुए पकड़ा जाता है तो उसे दो साल की सजा हो सकती है। इसके लिए किसान भाई दुकानदार से रसीद जरूर ले लें, क्योंकि रसीद के आधार पर ही शिकायत कर सकते हैं।

कृषि विभाग में एक वरिष्ठ  अधिकारी बताते हैं, ''किसान दुकान से कीटनाशक लेते समय खरीद की पर्ची जरूर लें क्योंकि अगर कीटनाशक ठीक से काम नहीं करता और किसान इसकी शिकायत करना चाहता है तो उस दशा में रसीद ही वह आधार होती है जिससे वह शिकायत कर सकता है। इसके लिए किसान अपने जनपद या ब्लॉक के पीपीओ अधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। कीटनाशक की जांच सरकारी प्रयोगशाला में की जाती है और मानक के अनुरूप न पाए जाने पर दुकानदार पर मुकदमा दर्ज कराया जाता है।" वह आगे बताते हैं, ''नकली कीटनाशक जैसी कोई चीज नहीं होती, कीटनाशक असल में कई तरह के जहरीले रसायनों का मिश्रण होता है जिसमें सबकी मात्रा एक अनुपात में होनी चाहिए और अगर इनमें कोई भी रसायन निर्धारित अनुपात में नहीं है तो उसका इस्तेमाल करने पर जो खेत में असर होना चाहिए वह नहीं होता।"

लखनऊ से करीब 20 किमी उत्तर दिशा में शाहपुर गाँव के रहने वाले मोहनदीन (40) बताते हैं, ''हमने मिर्च बोई थी और उसमें भंगरा कीट लग गया, इसके लिए टिकैतगंज से दवा लाए और छिड़काव कर दिया। दवा बेअसर रही और सारे फूल झड़ गए, पत्तियां ऐंठ गईं।" रसीद लेने के बारे में वह कहते हैं, ''रसीद तो हम कभी लेते ही नहीं, और उसकी कभी जरूरत पड़ी भी नहीं।"

इस बारे में  कृषि विभाग के यह वरिष्ठï अधिकारी कहते हैं, ''एक तो किसान रसीद लेते नहीं और अगर कभी मांगते भी हैं तो उन्हें दुकारदार यह कहकर टालने की कोशिश करते हैं कि अगर रसीद बनवाओगे तो इसमें वैट और अन्य टैक्स बढ़ जाएंगे और किसान कुछ पैसे बचाने के लालच में रसीद ही नहीं लेते। जिससे दुकानदार उन्हें ठगते हैं।" वह आगे कहते हैं, ''अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि अभियुक्त घटिया या वर्जित कीटनाशक बेच रहा था तो उसे 10,000 से 50,000 तक जुर्माना या 2 साल की कैद या दोनों हो सकती है। यह सजा पहली बार के लिए है, पर दूसरी बार में 75,000 का जुर्माना और 3 साल तक की कैद हो सकती है।"

साल 2012-13 में कृषि विभाग ने पूरे प्रदेश से 6,158 कीटनशकों के नमूने लिए जिसमें 291 नमूने तय मानक से नीचे पाए गए। जिसके बाद 30 लोगों का लाइसेंस रद्द कर दिया गया और 118 पर मुकदमा दायर कराया गया। 

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