Monday 3 June 2013

1090 पर गाँव की लड़कियां भी करेंगी मनचलों की शिकायत


गाँवों में 'वूमन पावर हेल्पलाइन' के बारे में किया जाएगा जागरुक

लखनऊ। ''मेरे गाँव की लड़कियां कहती हैं कि जब दीदी पुलिस में हैं तो मुझे डरने की जरूरत नहीं" ये कहते हुए प्रीति वर्मा के चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलकता है। प्रीति वर्मा अपने गाँव से पहली लड़की है जो नौकरी कर रही है वो भी पुलिस में।

ये बात अब बाराबंकी जिले में स्थित प्रीति वर्मा के गाँव लक्षबर की लड़कियां ही नहीं, उत्तर प्रदेश के हर गाँव की लड़कियां कह पाएंगी। क्योंकि प्रदेश की हर गाँव की लड़कियां अब सीधे 'वूमन पावर हेल्पलाइन-1090' से जुड़ पाएंगी। उन्हें सक्षम बनाने और वूमन पॉवर हेल्पलाइन से सीधे जोडऩे के लिए यहां काम कर रही महिला कांस्टेबल को गाँव-गाँव और कस्बों में भेजा जाएगा। जो स्कूलों और कॉलेजों में जाकर लड़कियों को बताएंगी कि कैसे वह 1090 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकती हैं।

गाँव और कस्बों में जाने के लिए 15 महिला कांस्टेबल का चयन करके उनकी ट्रेनिंग भी शुरू हो चुकी है। जिन्हें जुलाई के पहले सप्ताह से गाँवों में लड़कियों को 1090 की सेवा के बारे में बताने के लिए भेजना शुरू कर        दिया जाएगा।

 ''शहर में तो लड़कियां वूमन पावर हेल्पलाइन नंबर 1090 के बारे जानती हैं लेकिन गाँवों में अभी लोग इसे अच्छे से नहीं जान पाए हैं। जिसके लिए कस्बों के स्कूल, कॉलेजों में जाकर, यहां पढऩे आने वाली गाँव की लड़कियों को बताया जाएगा कि अगर कोई फोन से या एसएमएस करके परेशान कर रहा है तो कैसे वह फोन से ही शिकायत दर्ज करा सकती हैं, और पीडि़ता की पहचान भी गुप्त रखी जाएगी।"  लखनऊ स्थित वूमन पावर लाइन के रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर राघवेन्द्र सिंह बताते हैं। वह आगे कहते हैं, ''पहले चरण में इसे लखनऊ परिक्षेत्र में शुरू किया जाएगा, उसके बाद पूरे प्रदेश से इच्छुक महिला कांस्टेबल को बुलाकर उन्हें ये प्रशिक्षित महिला कांस्टेबल टे्रनिंग देंगी ताकि वो अपने-अपने जिलों में जाकर वहां वूमन पावर हेल्पलाइन नंबर 1090 के बारे में लड़कियों को बता सकें।"

15 नवंबर-2012 से शुरू की गई इस हेल्पलाइन नंबर पर पिछले छह माह में कुल मेच्योर्ड कॉल्स (एक मिनट की ऊपर की) 1 लाख, 94 हजार आई हैं। इनमें से 74 हजार 700 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से सबसे ज्यादा शिकायतें करीब 20,000 हजार से ऊपर 20 से 25 आयु वर्ग के लोगों से आईं।  

पिछले छह माह के आंकड़ों से साफ पता चलता है कि कुल शिकायतों से सबसे ज्यादा शिकायतें करीब 30,000 से ऊपर छात्राओं की ओर से ही आईं। गाँवों में जाकर लड़कियों को 1090 के बारे में बताने के लिए प्रशिक्षित की जा रहीं 15 महिला कांस्टेबल में शामिल प्रीति वर्मा कहती हैं, ''हमें ट्रेनिंग के दौरान यह बताया गया है कि कैसे हम गाँव और कस्बों की लड़कियों के मन से झिझक और डर को खत्म करें। साथ ही यह भी बताएंगे कि उनकी गोपनीयता बरकरार रखी जाएगी और कभी थाने नहीं बुलाया जाएगा।"
  
उन्नाव जिले के सुम्हारी गाँव की रहने वाली महिला कांस्टेबल रचना बाजपेई 'वूमन पावर लाइन' से जुड़कर काफी खुश हैं। वह कहती हैं, ''गाँव में लड़कियां डर और संक ोच में अपने घरवालों से कुछ भी नहीं बताती और सबकुछ सहती रहती हैं। हमें अच्छा लग रहा है कि हम कुछ कर पा रहे हैं।"

अभी हाल ही में 15 लड़कियों के बैच को गाँवों में जाने के लिए दो दिन की स्पेशल ट्रेनिंग भी दी गई है। जिसमें बताया गया कि कैसे अपनी बात को दूसरे के सामने रखते हैं, और अपनी कही हुई बात से लोगों को कैसे प्रभावित करते हैं।

इस बैच की महिला कांस्टेबल को ट्रेनिंग दे रहे 'एलिमेंट' के सीईओ और आईआईएम लखनऊ की गेस्ट फैकल्टी प्रोफेसर निशांत सक्सेना बताते हैं,''ट्रेनिंग सेशन के दौरान इन 15 महिला कांस्टेबल को बताया गया कि बोलने से पहले कैसे आप श्रोताओं के सवाल को समझें और अपनी बात ऐसे रखें कि लोग प्रभावित हों। ट्रेनिंग के दौरान इन लड़कियों से चार प्रेजेंटेशन करवाए और आखिरी पे्रजेंटेशन कुछ गाँववालों के सामने कराया तो उनमें काफी बदलाव दिखा।" वह आगे बताते हैं, ''हर महिला कांस्टेबल की वीडियो रिकर्डिंग भी कराई गई और जिससे बाद में उन्हें बताया गया कि उन्हें कहां-कहां सुधार की जरूरत है। इतना ही नहीं इन्हें अमिताभ बच्चन, शबाना आज़मी और शाहरुख की वीडियो रिकॉर्डिंग भी दिखाई गई और बताया गया कि  कैसे भीड़ के सामने बात की जाती है।"

वूमन पावर लाइन टीम में शामिल रायबरेली जिले के बछरावां कस्बे की रहने वाली अर्चना बताती हैं, ''मुझे तो यहां काम करके काफी अच्छा लग रहा है और मैं हमेशा यहीं रहना चाहती हूं।"  थोड़ा मुस्क राते हुए वह कहती हैं,''अब तो घर से भी फोन आता है तो हमारे मुंह से सबसे पहले यही निकलता है, 'नमस्कार, मैं वूमन पावर लाइन से बात कर रही हूं, मैं आप की क्या मदद कर सकती हूं।"

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