Monday 20 May 2013

ऊसर में भी लहलहाएगी फसल


ऐसे होता है 'एसआर  बायोज'  का इस्तेमाल


देवांग राठौर

बरेली। अब ऊसर में भी फसलें लहलहाएंगी।   इसके लिए उनको कुछ सौ रुपये और लगभग एक महीने का समय लगेगा। आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने तीन बैक्टीरिया के मिश्रण से ऐसी तकनीक विकसित की है जो ऊसर जमीन को भी उपजाऊ बना देगी। 

वैज्ञानिकों ने इस मिश्रण का नाम 'सीएसआर बॉयो' दिया है। इस मिश्रण से पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता है। 'सीएसआर बॉयो' को बनाने में केन्द्रीय मृदा लवणता संस्थान (सीएसएसआरआई), केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान(आईवीआरआई) और सेंट्रल  इन्स्टीट्यूट फॉर सब ट्रॉपिकल हार्टिकल्चर (सीआईएसएच) के वैज्ञानिकों ने  मिलकर बनाया है। उत्तर प्रदेश में कई जिलों में अपार सफ लता के बाद जून में इस मिश्रण को किसानों के लिए बाजार में उतारने की तैयारी है। 

राष्ट्रीय कृषि नवोन्मेषी परियोजना के तहत भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान (आईवीआरआई) के प्रधान वैज्ञानिक डॉ आरबी राय ने 2009 में ऊसर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। वह बताते हैं, ''2009 से इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ। इसमें तीन वैक्टीरिया सूडोमोनास, ट्राइपोडर्मा और बैसिलिस के मिश्रण से बनाया गया पदार्थ जमीन की उपजाऊ क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है।" वह आगे बताते हैं, ''इस मिश्रण के प्रयोग काफी अच्छे रहे हैं। द्रव और पाउडर दोनों प्रकार में तैयार मिश्रण का बाराबंकी, रायबरेली, फैजाबाद, जौनपुर, अंबेडकरनगर और दक्षिण भारत के कई हिस्सों के ऊसरीली जमीन पर प्रयोग किया गया। परिणाम काफी  अच्छे आए। जमीन में सोडियम और पोटेशियम की मात्रा संतुलित हो गई। जहां घास भी नहीं उगती थी, वहां फसलें  लहलहाने लगीं।" 

ऊसर जमीन पर पहले ढैंचा बोकर फिर इसे मिट्टी में मिलाकर बायोमास तैयार किया जाता है, इससे 'सीएसआर बायो' की मदद से बीज उपचार कर के  बोया जाता है। बायोमास और सीएसआर बायो मिलकर जमीन को उपजाऊ बना देते हैं। इस तकनीक पर प्रति एकड़ केवल 400 रुपये का खर्च आता है।

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