Tuesday 16 April 2013

आयुर्वेद को सरल भाषा में समझायेंगी अमेरिका की महिला डॉक्टर


शिकागो। अमेरिका, तिब्बत, चीन, ब्राज़ील, नाइजीरिया और एल साल्वाडोर में अपने जौहर दिखाने के बाद डॉ भास्वती भट्टाचार्य अब चल पड़ी हैं काशी की ओर। उच्च स्तर की शिक्षा क्या रंग लाती है उस का भास्वती एक प्रेरणा दायक उदहारण है। हाल ही में इन्हें यहां के फुलब्राईट प्रोग्राम की वजह से मशहूर एक प्रतिष्ठित संस्था द्वारा वाराणसी में आयुर्वेद चिकित्सा विज्ञान में संशोधन के लिए नियुक्त किया गया है। कोलकाता में जन्मीं और अमेरिका के कई नामी विद्यालयों में पढ़ीं भास्वती पेशे से एक डॉक्टर हैं। लेकिन इतने सारे विषयों की शिक्षा पाने के बाद वे अब अमेरिका कि एक प्रमुख होलिस्टिक हीलर यानि कि हमारे पूरे स्वास्थ्य को सुधारने वाली डॉक्टर मानी जाती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ़  पेनसिलवेनिया से बायोलोजिकल बेसिस ऑफ़  बिहेवियर में बीए किया, फिर कोलंबिया यूनिवर्सिटी से फार्माकोलॉजी और न्यूरोलॉजी में मास्टर्स लिया उसके बाद भास्वती ने पीएचडी भी की। भास्वती इतने से भी नहीं रुकीं उन्होंने अमेरिका की सबसे बड़ी मानी जाने वाली हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर्स इन इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ की डिग्री हांसिल की और आखिर में मेडिकल डॉक्टरेट किया 'मेडिकल कॉलेज से'।

भास्वती अब काशी स्थित बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी जाने की तैय्यारी में लगीं हैं। इस यात्रा के लिए वे उत्साहित तो हैं ही साथ ही साथ नर्वस भी हैं। वो भारतीय मूल की ज़रूर हैं लेकिन उनका पूरा चिकित्सा करियर अमेरिका और दूसरे मुल्कों में ही रहा है। इसीलिये वे थोड़ी चिंतित हैं कि वहां के लोग उन्हें कैसे अपनायेंगे, "मुझे लगता है की शुरू-शुरू में शायद लोग मेरे क्रियाकलापों पर गौर करेंगे, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हंू। अपना घमंड त्याग कर, नियम से मैडिटेशन (ध्यान लगाकर) करके मैं अपना काम करुंगी।" भास्वती ने गाँव कनेक्शन को न्यूयॉर्क से बताया। वैसे फुलब्राइट प्रोग्राम ने जो उनको स्कॉलरशिप दी है वो इसलिए है कि भास्वती पूरे भारत में आयुर्वेद विज्ञान पर एक गंभीर रिसर्च करें। ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी एक फुलब्राईट स्कॉलर को बड़े स्तर पर संशोधन करने और शिक्षा देने की सहूलत दी गयी हो। यह एक बड़ा सम्मान माना जाता है।

भास्वती की रिसर्च ओजस यानि की हमारे शरीर की बिमारियों को दूर रखने की और उनसे लडऩे की क्षमता के बारे में होगी। भास्वती इसका भी अध्ययन करेंगी कि आयुर्वेद चिकित्सा किस हद तक असर कर सकती है। अपनी यात्रा के दौरान वे आयुर्वेद से जुड़ी वैज्ञानिक व्याख्याओं का इस तरह अनुवाद करेंगी कि आधुनिक डॉक्टरों को वो जानकारी समझ में आ सके।  वे भारत के आयुर्वेद के विशेषज्ञों से शोध में प्राप्त परिणामों को लेकर चर्चा भी करेंगी और यह भी सुझाव लेंगी कि परिणामों को अमेरिका की शिक्षा में कैसे शामिल किया जाए तथा कैसे अमेरिकी और भारतीय विशेषज्ञों के बीच मेल-जोल बढ़ाया जाए।

भास्वती की यात्रा का एक उद्देश्य यह भी होगा कि कैसे संस्कृत में लिखे आयुर्वेद विज्ञान को अंगेजी भाषा के माध्यम से दुनिया के और लोगों तक पहुंचा सकती हैं।  "आपने ऊर्जा पर आधारित संस्कृत जैसी भाषा और चिकित्सा की सटीक भाषा के बीच जिस तकनीकी स्थानान्तरण कि जो बात कही उसके बारे में कृपया विस्तार से बताइए।" इसके उत्तर में भास्वती कहती हैं, "तकनीकि स्थानान्तरण का मतलब है जानकारी का स्थानान्तरण वो भी व्यवहारिक प्रयोगों के साथ। मै आयुर्वेद की जानकारी का अनुवाद ऐसे शब्दों में करने की कोशिश करूंगी जिन्हें वर्तमान चिकित्सा जगत समझ सकें।

ऊर्जा आधारित संस्कृत भाषा का उन लोगों के लिए आसानी से अनुवाद नहीं मिलता जो वाकई विश्व को बारीकी से देखते हैं। खगोल भौतिकी, आयुर्वेद और वैदिक सोच का एक महत्वपूर्ण भाग है। उदाहरण के तौर पर आधुनिक चिकित्सा जगत अब जाकर कुछ-कुछ समझ पाया है कि हमारा मस्तिष्क ही ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। इसके तथ्य उत्तराधुनिक भौतिकी, तंत्रिका विज्ञान और कैंसर से सुधार पर किये गये शोधों में मिल जायेंगे। लेकिन आधुनिक चिकित्सा कीमोथेरेपी (कैंसर के इलाज की पद्घति) में इतनी उलझी है कि वह कुछ नया नहीं देख पा रही है। तब क्या होगा अगर कैंसर और बीमारियों के खिलाफ छेड़ी गई जंग से जीवन बचने के बजाए खतरे में पड़ जाए, बीमारियां और बढ़ जाएं? अगर सकारात्मक विचारों से शरीर में विद्युत तरंगें उत्पन्न हों तो? विश्वभर से संयोग बनाते हुए संस्कृत बताती है कि कैसे हमारे क्रियाकलाप, बड़ी शक्तियों और क्रियाओं के गणितीय संसार से सम्बंधित हैं। धर्म, कर्म और भाग्य जैसे शब्दों का अंग्रेजी में सटीक अनुवाद नहीं किया जा सकता।

ऐसा ज़रूर संभव है कि भास्वती के काम के बाद अमेरिका के स्वास्थ्य विज्ञान, जो की आधुनिक धारणाओं पर आधारित है, खुद में एक मूलभूत बदलाव लाये। जैसे कि भास्वती बताती हैं,"आयुर्वेद वो विज्ञान है जो की शरीर, दिमाग, इन्द्रियों और आत्मा के बीच हो रही एक दूसरे को प्रभावित करने वाली क्रियाओं से जुड़ा है। मतलब यह कि आयुर्वेद एक पूरा संतुलित विज्ञान है।" कलकत्ता से न्यू यॉर्क, बीजिंग, रिओ दे जनिरो, अबुजा और सेन सेल्वाडोर जैसी जगहों से होते हुए भास्वती अब पहुंचेंगी काशी। जहां से वे अपनी शिक्षा और ज्ञान के बलबूते आयुर्वेद के एक नये समाज को लेकर वापस लौटेंगीं।

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