Tuesday 30 April 2013

60% तक पानी बचता है बाल्टी-पाइप सिंचाई से


अमूल्य रस्तोगी

लखनऊ। एक तरफ मौसम की मार और दूसरे डीजल और बिजली की बढ़ती कीमतों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों को खेतों में सिंचाई के लिए काफी ज्यादा खर्च करना पड़ता है और साथ ही परंपरागत तरीकों से पानी की बर्बादी भी काफी होती है।

अगर ऐसी तकनीक अपनाई जाए जिसमें ज्यादा खर्च भी न हो और पानी की बचत भी हो तो कितना अच्छा हो। ऐसी ही तकनीक है बकेट ड्रिप इरिगेशन (बाल्टी की मदद से सिंचाई)। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए बिजली की जरूरत नहीं, बल्कि यह तकनीक तो जमीन की गुरुत्वाकर्षण बल से चलती है।

इस तकनीक में बाल्टी को ऊंचाई पर रखा जाता है और पाइपों की कतार में बिछा कर पौधे की जड़ तक ले जाया जाता है। बाल्टी को ऊंचाई पर रखने से पानी के दबाव और गुरुत्वाकर्षण बल पानी को धकेलता है। यह तकनीक सब्जियों की सिंचाई आदि के लिहाज से काफी अच्छी होती है, क्योंकि इसमें पौधे एक दूसरे से कुछ दूरी पर लगे रहते हैं।

केंद्रीय मृदा लवण शोध संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल सिंह बताते हैं,  "सिंचाई की इस तकनीक से किसान करीब पानी की 50 से 60 प्रतिशत तक की बचत कर सकते हैं।"

यह तकनीक छोटे खेतों के लिए काफी उपयुक्त है और प्रदेश में सीमांत किसानों की संख्या काफी है जो इसका लाभ उठा सकते हैं। कृषि मंत्रालय द्वारा कराए गए कृषि जनगणना के मुताबिक साल 2005-06 में उत्तर प्रदेश के 77.96 फीसदी किसानों के पास एक हेक्टेयर से कम भूमि है जो 2010-11 तक 79.23 फीसदी तक आ गया है। सीमांत किसानों की इस संख्या की जिम्मेदारी बढ़ती अबादी और छोटे हिस्सों में बंटते परिवार हो सकते हैं।  
"सिंचाई की इस तकनीक से एक छोटे खेत को बिना दिक्कत से सींचा जा सकता है। अगर क्षेत्रफ ल बढ़ता है तो पाइप की लंबाई और बाल्टी का आकार भी उसी अनुपात में बढ़ाने की ज़रूरत होती है।" अतुल सिंह बताते हैं। साथ ही वह आगे कहते हैं, "पानी के पाइप में किसान माइक्रो ट्यूब का इस्तेमाल कर सकते हैं यह पतले पाइप की तरह होती है, जिससे दबाव मामूली तौर पर बढ़ जाता है और पानी दूर तक जाता है।"

इस तकनीक से सिंचाई करने पर डीजल और बिजली की बचत होती है। बकेट ड्रिप सिंचाई तकनीक में घर में इस्तेमाल होने वाली बाल्टी और पाइप का इस्तेमाल किया जाता है। सिंचाई की इस सस्ती तकनीक का इस्तेमाल भारत मे कुछ जगहों, अफ्रीकी देशों सहित 150 देशों के किसान कर रहे हैं।

इस सिंचाई तकनीक के लिए 25 वर्ग फु ट का क्षेत्रफ ल सबसे सही आकार रहता है। यह तकनीक मैदानी क्षेत्रों के अलावा पहाड़ी इलाकों में टै्रक फार्मिंग में भी कारगर है।

अगर किसी ने अपने एक खेत में अलग-अलग हिस्सों में बांट कर दो-तीन तरह की फ सलें लगा रखी हैं। उन्हें भी इस तकनीक से खासा लाभ हो सकता है, ऐसा इसलिए क्योंकि बकेट सिंचाई तकनीक में किसान इस सिस्टम को एक से दूसरी हिस्से में लगा और हटा सकता है। इसे बड़े आराम से लगाया हटाया जा सकता है।  वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल सिंह बताते हैं, "इसमें इस्तेमाल होने वाली चीजें घर पर ही मिल जाती हैं  हालांकि बाजार में बकेट इरिगेशन किट उपलब्ध है लेकिन घर पर बनाए गए सिस्टम में कोई खास अंतर नहीं होता। किसान भाई अगर कीमत और कम करना चाहते है तो पानी के थैले का भी इस्तेमाल कर सकते है।" बाजार में इस सिंचाई किट की कीमत करीब 1200 रुपये के आसपास है।

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