Tuesday 15 January 2013

क्योंकि मिस कॉल भी है बड़े काम की चीज़



टेलीकॉम इन्डस्ट्री के पंडितों ने जब मोबाईल टेलीफोनी के बारे में सोचा होगा तो मिस कॉल नाम का ये शब्द उनके ज़ेहन में शायद ही आया हो। वाशिंग मशीन में लस्सी बना लेने का माद्दा रखने वाले हमारे इस जुगाड़ू देश ने मिस कॉल नाम के इस शब्द को अपनी भाषा और यहां तक कि रोज़मर्रा की बातचीत हिस्सा बना लिया है। 

भोजपुरी गानों से लेकर बालिवुड आईटम नम्बर तक में सैंया को पटाने के नुस्खों में शामिल होने के बहाने से जगह बना लेने वाले इस नटखट से शब्द को खोजने का श्रेय हमारे देश को ही जाता है। 

लखनउ से लगभग 15 किलोमीटर दूर काकोरी में रहने वाले फहद खान (22 ) के पास 1998 में पहली बार मोबाईल आया। वो बताते हैं- "तब 8 रुपये मिनट के हिसाब से पैसे लगते थे। इसलिये जब भी ज़रुरत होती थी पापा को मिस कॉल कर देते थे।" धीरे धीरे मिस कॉल नाम का ये तकनीकी शब्द फहद जैसे कई युवाओं की जि़न्दगी में हंसी ठिठोली का ज़रिया भी बन गया। "अब तो सस्ती स्कीम्स आने से मिस कॉल खत्म ही होती जा रही हैं लेकिन जब दोस्तों के पास नये नये फोन आये थे तो मिस कॉल दे देकर दोस्तों को परेशान करने में खूब मज़ा आता था। कहते हुए फहद को अपनी शैतानियां याद आ जाती हैं।"

खासकर ग्रामीण भारत में जैसे जैसे मोबाईल फोन के उपभोक्ता बढ़ने लगे मिस कॉल  के प्रचलन में भी दिन दूनी और रात चैगुनी बढ़ोतरी होने लगी। साल 2012 तक अकेले ग्रामीण भारत में मोबाईल के उपभोक्ताओं की संख्या 32 करोड़ से ज्यादा पहुंच गई। किसी भी तरह पैसे बचाने की मानसिकता रखने वाले भारतीय मध्यवर्ग और निम्न वर्ग ने मिस कॉल नाम की इस आसान युक्ति को हाथों हाथ लिया।   

टेलीकौम इंडस्ट्री पर किये गये शोध बताते हैं कि मिस कॉल  नाम का ये भारतीय जुगाड़ इंडस्ट्री के राजस्व को तकरीबन 25 से 30 प्रतिशत तक का नुकसान पहुंचाता है। क्योंकि पूरे देश में होने वाली कुल काल्स का 40 फीसदी हिस्सा इन जानबूझकर अधूरी छोड़ दी जाने वाली कॉल्स  ने ले लिया। 

मेरठ के श्यामनगर से कपड़े बेचने लखनऊ आये शाईब बताते हैं कि जब फोन में बैलेंस कम होता है तो हम मिस कॉल  मार देते हैं। 

भारत के ग्रामीण इलाकों में पुकार, धाल या धाद नाम की प्रक्रिया जिसे दूर दूर मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिये अक्सर प्रयोग किया जाता था उसे मिस कॉल  नाम की इस तकनीक ने जैसे स्थानान्तरित कर दिया हो। ज़ोर ज़ोर से आवाज़ लगाने का फैशन अब आउट आफ डेट हो गया है। अब तो गांवों में भी लोग मिस कॉल - मिस कॉल  खेल के ज़रुरी बातें कह जाते हैं। 

मिस कॉल  का चलन जैसे जैसे आदतों में शुमार होता गया वैसे वैसे बाज़ार उसे गम्भीरता से लेने लगा। देखते ही देखते आदत से उपजा ये शब्द, तकनीकी विशेषज्ञों के लिये अनुसंधान का विषय बन गया।

चेन्नई के कोयम्बटूर से 512 किलोमीटर दूर पेराम्बूर के गांवों के किसानों के लिए मिस कॉल  की एक अनौखी उपयोगिता है। यहां के किसानों में अपने घर पर बैठे हुए बस एक मिस कॉल  देकर सिंचाई के पंपों को ऑन या ऑफ करने वाली एक डिवाईस लोकप्रिय हो रही है। सिंचाई के पम्पों के लिए मिस कॉल  से चलने वाली ये डिवाईस तैयार करने वाले रियलटैक सिस्टम के प्रबन्ध निदेशक टी कुमार बताते हैं  "यहां किसानों के घर उनके खेतों से दूर हैं। मैने अपने पिताजी को खेतों में सिंचाई के पंपों को ऑन ऑफ करने के लिये बार बार परेशान होते हुए देखा था। 3 साल पहले खयाल आया कि क्यों न सिंचाई के पंपों में एक ऐसी डिवाईस लगायें जिससे ये पंप खुद ऑन ऑफ हो सकें। हमने रियल मोबाईल स्टार्टर नाम की एक डिवाईस तैयार की। इस डिवाइस में सिम कार्ड लगता है। इस डिवाईस में 10 फोन नम्बर फीड किये जा सकते हैं। इन नम्बरों से मिस कॉल आने पर ये डिवाइस अपना काम शुरु कर देती है।"

कुछ बैंकों ने भी बस एक मिस कॉल  देकर अपना अकाउंट बैलेंस और अन्य जानकारियां मुहैय्या कराने की सुविधा अपने खाता धारकों को देनी शुरु की है। वहीं टीवी चैनलों के रियलिटी शोज़ में अपने पसंदीदा प्रतिभागियों को अब मैसेज की जगह मिसकौल देकर वोट करने की सुविधा मिलने लगी है। 

समाज़ से जुड़े आन्दोलनों में अपना विरोध जताने के हथियार के रुप में भी मिस कॉल  ने अपनी अहम जगह बनाई है। ईंडिया अंगेस्ट करप्शन द्वारा संचालित भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन में एक करोड़ लोगों ने मिस कॉल  देकर अपना विरोध जताया। 

घरों की सुरक्षा के लिये बनाये जाने वाले उपकरणों में भी मिस कॉल  की यह तकनीक प्रयोग की जाने लगी है। अब ऐसे उपकरण बाज़ार में उपलब्ध हैं जिनके ज़रिये घर में आग लगने या चोरों के घुस आने पर आपके फोन पर मिस कॉल आ जाएगी। 

भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मिस कॉल का प्रचलन अब आम हो गया है। अमेरिका में ड्राप काल, अफ्रिका में बीप, इंगलैंड और आस्ट्रेलिया में प्रेंक के नाम से ये मिस कॉल  मोबाईल के कॉल  लौग में सहेजी जाती है। बांग्लादेश में टेलीफोनिक नेटवर्क का 70 प्रतिशत ट्रेफिक मिस कॉल  के कारण ही होता है।    

मिस कॉल  नाम का ये शब्द हमारी शब्दावली में इतना गहरा असर छोड़ चुका है कि अब ये बहुत जाना चहचाना सा लगता है। लेकिन ग्रामीण भारत के लोग जैसे अंग्रेजी़ के कई शब्दों का प्रयोग बिना जाने ही बड़े धड़ल्ले से करते हैं वही हाल मिस कॉल के प्रयोग को लेकर भी है। मिस कॉल क्या होती है पूछने पर लखनउ के काकोरी के पास के गांव कठिंगरा में रहने वाले राजदेव सिंह (56) कहते हैं- "हम ने सुना तो है पर मिसकाल का इस्तेमाल कभी किया नहीं। हमारी समझ से मिस कॉल  मतलब किसी चीज़ की सूचना देना। जैसे फोन में जो बताते हैं कि ये स्कीम आई है, वो स्कीम आई है, उसी को मिस कौल कहते हैं।" उनके पीछे खड़ा उनका लड़का जब उन्हें मुस्कुराते हुए मिस कॉल के असल मायने बताता है तो मिस कॉल को लेकर अपनी इस मिसटेक पर वो झेंप जाते हैं। 

                                                            मिस कॉल ? ज़रा बचके....


क्या आपके पास कभी किसी अनजान नम्बर से मिस कॉल  आई है? आमतौर पर हम सभी ऐसे नम्बरों पर वापस कॉल  करके ये जानने के लिये उत्सुक रहते हैं कि आंखिर ये नम्बर किसका है। अनजान नम्बरों से आने वाली मिस कॉल  पर कॉल  बैक करना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है। बीते साल ऐसी कई घटनाएं सामने आई जिनमें कई लोगों ने शिकायत की कि उन्हें कई अनजान नम्बरों से मिस कॉल  आ रही हैं। ये नम्बर अक्सर 0923 से शुरु होने वाले नम्बर थे। कई लोगों ने जब इन नम्बरों पर कॉल  बैक किया और कुछ देर  बात करने के बाद अपने फोन का अकाउंट बैलेंस देखा तो वो हैरत में आ गये। 

दरसल ये मिस कॉल पड़ौसी देशों से दी जा रही थी और इनका मकसद बस इतना था कि आप किसी तरह इन नम्बरों पर वापस फोन कर लें और आपके फोन करने पर ये आपको लाखों की लौटरी का झांसा देकर देर तक उलझाये रखें। इन नम्बरों पर फोन करने की कॉल  दर 80 से 90 रुपया प्रति मिनट थी। ये कॉल  अक्सर ऐसे वक्त में किये जाते थे जब लोग अपने घर पर रहते हैं और काल वापस की स्थिति में रहते हैं। 

तो अगली बार आपके पास किसी ऐसे नम्बर से मिस कॉल आये तो सावधान रहियेगा। वरना आपको भी अपने अकांउंट बैलेंस से हाथ धोना पड़ सकता है।  




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