Tuesday 15 January 2013

अमरीका डायरी: एक दिन कोई भारतीय बनेगा अमेरिकी राष्ट्रपति



शिकागो। हाल ही में सम्पन्न हुए राष्ट्रीय अमेरिकी चुनावों में दो ऐसे नाम उभरे हैं जिनका भारतीय संस्कृति एवं भारत से एक खास सम्बन्ध है। अमेरिका के राष्ट्राध्यक्ष बराक ओबामा के दुबारा चुने जाने के साथ यहां की संसद जिसे कांग्रेस और सेनेट कहा जाता है उसके भी चुनाव हुए।

दो ऐसे लोग जिनका भारत से या उसकी संस्कृति से सीधा जोड़ हो वह हैं तुलसी गब्बर्ड और अमरीश बेरा। दोनों ही डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य हैं और दोनों ने अब अपने-अपने क्षेत्र से चुनाव जीत कर अपना स्थान अमेरिका की कांग्रेस में जमा लिया है।

तुलसी गब्बर्ड अमेरिका के हवाई राज्य से चुनी गयीं और अमरीश बेरा कैलिफ़ोर्निया राज्य से। तुलसी की खासियत यह है की वो भारतीय होते हुए भी अपने बचपन से ही भारतीय संस्कृति में विश्वास रखती आई हैं। वो अपने आप को एक हिन्दू मानती हैं बावजूद इसकेकी उनका जन्म एक अमेरिकी ईसाई परिवार में हुआ।

यहां तक कि उनकी माता, जिनका नाम कैरोल है और जो खुद को हिन्दू बताती हैं, ने अपनी बेटी का नाम तुलसी इसीलिए चुना। अमेरिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब कांग्रेस के किसी सदस्य ने अपने आप को हिन्दू बताते हुए अपनी शपथ भगवद गीता पर हाथ रखकर ली जैसे कि तुलसी ने हाल ही में किया।
तुलसी का यह कहना है गीता के बारे में, "मेरे लिए भगवद गीता एक अंदरूनी शक्ति का स्रोत है जिससे मुझे यह शिक्षा मिलती है कि अपने लोगों की और अपने देश की कैसे सेवा करूं।" उन्होंने महात्मा गांधी को भी एक महान हिन्दू बताते हुए कहा किवो उनके आदर्शों पर चलती हैं। इकत्तीस साल की तुलसी को अपनी डेमोक्रेटिक पार्टी में बड़ी उम्मीद से देखा जा रहा है और बहुत सारे लोग यह समझते हैं कि उनका राजनीतिक भविष्य बहुत सुनहरा है।

तुलसी के साथ-साथ अमरीश बेरा, जो व्यवसाय से एक डॉक्टर हैं, को भी अमेरिका में बसे करीबन तीस लाख भारतीय मूल के लोग बड़ी आशा से देख रहें हैं। पिछले पचास सालों में सिर्फ तीसरी बार किसी भारतीय मूल के नागरिक ने अमेरिका की संसद की सीट जीती है। ऐसा पहली बार 1957 में हुआ जब अमृतसर में जन्मे परन्तु अमेरिका निवासी दलीप सिंघ सोन्द कांग्रेस के लिए चुने गए। उन्होंने चार साल कांग्रेस में बिताये। उन के बाद सीधा सन 2005 में एक और भारतीय मूल के लेकिन अमेरिका में जन्मे पियूष बॉबी जिंदल ने कांग्रेस के लिए चुनाव जीता। फि़ लहाल जिंदल लूइसिआना राज्य के गवर्नर हैं, अमेरिका का गवर्रनर वैसे ही होता है जैसे भारत में मुख्यमंत्री होते हैं।

अमरीश बेरा का परिवार भारतीय मूल का है और वो एक अकेले ही कांग्रेस के सदस्य हैं जो भारतीय मूल के हैं तो यह स्वाभाविक बात है कि अमेरिका निवासी सभी भारतिय उन से आशा लगाए हैं।

ऐसा होना असंभव नहीं किभविष्य में किसी भारतीय मूल का राजनेता अमेरिका का राष्ट्रपति भी बने। वो इसलिए भी संभव है क्योंकि इस मुल्क में आप कौन हैं इससे ज्य़ादा आप के हुनर और उपलब्धियों की कदर है। वैसे भारत में अब आहिस्ता-आहिस्ता इस तरह का परिवर्तन देखने को मिलता है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि वह सब इतनी तेज़ी से नहीं हो रहा है।

यह ज़रूरी है कि गाँव मेें रहने वाले बड़े सपने देखें। उनमें यह भावना भी विकसित हो कि वह भी दुनिया के किसी भी मुल्क में जाकर अपनी खूबी दिखा सकते हैं। तुलसी गब्बर्ड और अमरीश बेरा तक ही यह सीमित हो ऐसा ज़रूरी नहीं है। यह तो एक शुरुआत है।

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