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गरिमा श्रीवास्तव |
बागपत। जब उन्नीस साल के मोहित ने हवा से किसी गाड़ी को चलाने की बात अपने दोस्तों से कही तो उसके सारे दोस्तों ने उसे पागल समझा पर इससे मोहित का हौसला कम नहीं हुआ। और आखिरकार जब उसका प्रयोग कामयाब हो गया तो वही दोस्त उसके जज्बे का सम्मान किये बिना नहीं रह सके। मोहित के इस प्रयोग के जरिये हवा के दाब से इंजन को न केवल चालू किया जा सकता है बल्कि इसकी मदद से गाडिय़ों को भी चलाया जा सकता है।
मेरठ के एक छोटे से गाँव पुराली में रहने वाले मोहित अपने नाना नानी के साथ रहते है नाना की खेती से घर का चूल्हा जलता जिसमें मोहित भी हाथ बटाता है। मोहित जिस गाँव में रहता है वहां बिजली का कोई अता-पता नहीं हफ्ते हफ्ते भर बत्ती गुल रहती है। कभी एक हफ्ते सिर्फ रात में बिजली दर्शन देती तो कभी सिर्फ सुबह आती है।
शांति इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल ऑटोमोबाइल इन्जीनियरिंग में डिप्लोमा कर रहे मोहित से ये पूछने पर कि उन्हें एयर प्रेशर से इंजन स्टार्ट करने का विचार कहां से आया, उन्होंने बताया ''मुझे घूमने का शौक था एक बार ट्रक से मैं पास के ही गाँव जा रहा था तभी मैंने देखा की ट्रक में लगने वाले ब्रेक एयर प्रेशर से लग रहे हैं। इस बात ने मुझे सोचने पर मजबूर किया और मैंने ये जानना शुरू किया कि एयर प्रेशर और किन चीज़ों में काम आता है, तो पता चला की ट्रेन की ब्रेक भी एयर प्रेशर से लगाई जाती है। बस तब मैंने सोचा जब एयर ब्रेक से इतनी लम्बी ट्रेन रुक सकती है तो कोई वाहन क्यूँ नहीं चल सकता। तब मैने सोचा कि मैं भी कुछ अलग करूँगा। मैंने एक पुराना यामाहा का इंजन कबाड़ी वाले से खरीदा और उसपे प्रयोग करना शुरू किया। मैं 4 बार फेल हुआ पर मैंने हिम्मत नही हारी। आखिरकार मेरी महनत रंग लाई और पांचवी बार के प्रयास में मैं सफ ल हुआ"
मोहित ने हवा के दाब से यामाहा के पुराने खऱाब पड़े इंजन को चला दिया। प्रयोग के लिए यामाहा का ही इंजन क्यूँ लिया इस पर मोहित बताते हैं , ''मुझे यामाहा का ही इंजन मिला पर मैं किसी भी इंजन को थोड़ा सा मॉडिफ ाई कर के उसको भी चला सकता हूँ।
मोहित पढ़ाई में हमेशा से औसत ही रहे। उन्हें हाईस्कूल में 43 तो इन्टर में 49 फीसदी अंक ही मिले। ''मैं शुरू से ही प्रयोग करता रहता था। बचपन से ही कभी आलू से बैटरी बनाना सीखना तो कभी सोलर एनर्जी से घर में बिजली जलाना, मैं इन्हीं कामों में लगा रहता था। इसलिये पढ़ाई पर कभी ध्यान नही दे पाया। इसके साथ मैं अपने नाना को खेती में भी मदद करता था इसलिए पढऩे के लिए ज्यादा समय नहीं निकाल पाता था। दूसरी जो सबसे बड़ी वजह थी वो यह की हमारे गाँव में बिजली की बड़ी समस्या है कब आयेगी कब नहीं कुछ पता नहीं" इससे पहले मोहित ने कई प्रयोग किये। रोटरी टाइप इंजन, मोटर वैन टाइप, एयर मोटर इंजन, फोर स्ट्रोक इंजन और टू स्ट्रोक इंजन ये सारे प्रयोग बिना पेट्रोल के गाड़ी चलाने के लिए किये गए थे। लेकिन पेट्रोल की आसमान छूंती कीमत को देखते हुए उनका ये नया आविष्कार मरहम जैसा साबित हो सकता है ।
मोहित बताते हैं की ''इसकी वर्किंग एकदम पेट्रोल की तरह होगी। मोटरसाइकिल या कार को पेट्रोल प्रेशर देता है यहां पर एयर इसे प्रेशर देगा। इसका पूरा मेकेनिज़म पेट्रोल की तरह ही होगा। जिस तरह से पेट्रोल डालने से गाड़ी चलती है उसी तरह एयर प्रेशर से गाड़ी भागेगी"
प्रयोग में हुए खर्च के बारे में पूछने पर मोहित ने बताया, '' इस प्रयोग में मेरे 18 हजार रुपये खर्च हुए। मेरी नानी ने नाना से छुपा के मुझे ये रूपये दिये क्योंकि नाना नहीं चाहते थे कि मैं ऐसा कुछ करूं। उन्हें भी ये सब बेकार लगता था"
घर में मोहित के 2 छोटे भाई बहिन जो माँ बाप के साथ बागपत के खट्टा गाँव में रहते हैं मोहित उनके लिए कुछ करना चाहते हैं।
कॉलेज के टीचर भी मोहित के इस प्रयोग से बहुत खुश हैं। कॉलेज में प्लेसमेंट सेल से जुड़े दीपक शर्मा बताते हैं। ''पूरा कॉलेज प्रशासन मोहित के इस कदम से खुश है हम मोहित को शुभकामनायें देते हैं और जो भी मदद मोहित को चाहिए होगी कॉलेज उससे उपलब्ध कराएगा"
अपने टीचर्स और कॉलेज के इस सहयोग से मोहित बहुत खुश हैं वो उत्साहित होकर बताते हैं, ''मैं बहुत खुश हूँ की कॉलेज मुझे सहयोग कर रहा है। मैं अपने गाँव वालों के लिए कुछ करना चाहता हूँ बस किसी तरह मेरा ये प्रयोग सफ ल हो जाये"
अपने प्रयोग को किसी बड़ी कम्पनी को बेचने के सवाल पर मोहित मुस्कुराते हुए कहते हैं, ''अभी तो मैं इस पर काम कर रहा हूँ पहले पूरी तरह से ये परीक्षण सफ ल हो जाये तब मैं सोचूंगा। अभी मेरा ध्यान सिर्फ इसको पूरी तरह से सफ ल करने में है "
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