Thursday, 7 March 2013

चुनावी चाशनी में डूबा बजट


लोकसभा चुनावों को देखते हुए ग्रामीण भारत पर दिया खास ध्यान

गाँव कनेक्शन डेस्क
लखनऊ। वर्ष 2013-14 के बजट ने आम आदमी को कई सपने दिखाए हैं। बजट में सरकार ने गाँवों के विकास के लिए हर ओर से ध्यान देने की कोशिश की है। चाहे वह विकास की योजनाएं हों या खेती के लिए अनुदान, हर क्षेत्र में बजट बढ़ाया गया है। अब देखना है कि गाँवों पर दिखाई वित्त मंत्री पी चिदंबरम की दरियादिली गाँवों की तस्वीर बदल भी पाती है, या फिर यह चुनावी चाशनी भर है। वित्त मंत्री ने इस साल के बजट में कुल 16 लाख 65 हजार 297 करोड़ रुपये खर्चने का प्रावधान किया है।

बजट में ग्रामीण विकास के लिए मंत्रालय को 80,194 रुपये आवंटित किए गए हैं, जो यूं तो पिछले साल की अपेक्षा 46 फीसदी ज्यादा है, लेकिन हकीकत तो यह है कि पिछले बार आवंटित 76 हजार 376 करोड़ में से केवल 55000 हजार करोड़ ही खर्च हो सके थे। इस बारे में लखनऊ विश्वविद्यालय के कामर्स विभाग के हेड प्रो. नार सिंह कहते हैं, "सरकार ने कुछ वर्गों को लाभ पहुंचाने के लिए कदम ज़रूर उठाए हैं लेकिन समग्र रूप से देखें तो सरकार को यह ज़रूर देखना चाहिए था कि क्या अब तक जितना बजट आवंटित किया गया उसका उचित परिणाम मिला। मनरेगा जैसी योजनाएं आज पैसे बांटने का कार्यक्रम बन गई हैं। इसी तरह अन्य योजनाओं का भी हाल है। जाहिर है कि अब बजट और बढ़ा दिया गया है तो बंदरबांट और बढ़ जाएगी।" वह आगे कहते हैं,"सरकार को अपनी आय बढ़ाने के इंतजाम पहले करने चाहिए थे। जिसके लिए विदेशों से विनियोग लाना जरूरी है। नहीं तो इस तरह के बजट से राजकोषीय घाटा बढ़ेगा और महंगाई बढ़ेगी। बढ़ती महंगाई क्या गाँव, क्या शहर सभी की कमर तोड़ देगी।"

सरकार ने चुनावी चाशनी में डूबा बजट पेश कर लोगों को लुभाने की कोशिश की है। किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए पिछले साल के मुकाबले 22 फीसदी बढ़ाकर कृषि मंत्रालय को इस बार 27 हजार 49 करोड़ रुपये दिए गए हैं। साथ ही, किसानों को ऋण देने के लिए 7 लाख करोड़ का जुगाड़ किया गया है, लेकिन हकीकत मेें किसानों की आय बढ़ाने और वे कैसे यह कर्ज लौटाएंगे इसका जिक्र तक नहीं किया गया। कृषि में अनुसंधान के लिए 3,415 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

सरकार ने दलितों के विकास के लिए 41 हजार 561 करोड़ रुपये जारी करके इन्हें रिझाने की पूरी कोशिश की ही है। लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग के प्रोफेसर कमल कुमार कहते हैं, "तमाम तरह की योजनाएं दिखाकर लोकसभा चुनावों में फायदा उठाने की कोशिश ज़रूर की है, लेकिन आज जनजन मेें राजनीतिक चेतना है, लोग विचार करते हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले दो बार से यूपी में पूर्ण बहुमत की सरकारें बन रही हैं। ताकि सरकारों को ये बहाना बनाने का मौका मिले कि सहयोगी दलों के दबाव के चलते वो योजनाएं लागू नहीं कर पाये। अब इस बार के बजट में घोषित योजनाएं अक्टूबर से लागू करने की बात हो रही हैै ताकि इनका प्रचार कर लाभ लिया जा सके। साथ ही, यह भी कहा जा सके कि आगे सत्ता में आने पर इनको लागू कराएंगे।"

साथ ही राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण अभियान के तहत 455 करोड़ रुपये का आवंटन भी किया गया है। खाद्य सुरक्षा बिल के लिए सब्सिडी के अलावा 10 हजार करोड़ का प्रावधान भी बजट में किया गया है। गाँव के लोगों को बैंकिं में दिक्कत हो इसके लिए डाकघरों के द्वारा बैंकिंग सुविधा देने की ओर कदम बढ़ाते हुए 532 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। डाकघर अब रियल टाइम बैंकिंग सेवाएं दे   सकेंगे। देश में लगभग 1 लाख 55 हजार डाकघर हैं जिसमें से सबसे ज्यादा डाकघर गाँवों में हैं। 

बेरोजगारी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कौशल विकास की योजनाओं को गाति देने की कोशिश की है। राष्टï्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और राष्टï्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत 12वीं पंचवर्षीय योजना में पांच करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करके रोजगार दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। आगामी वित्त वर्ष के दौरान करीब 90 लाख ग्रामीण और शहरी युवकों इसका लाभ मिलेगा। जिसके तहत युवाओं को ट्रेनिंग के बाद सरकारी और गैरसरकारी कंपनियों में रोजगार दिलाया जाएगा। प्रमाण पत्र के साथ दस हजार रुपये भी इनाम के तौर पर दिए जाएंगे।       

इसी के साथ गाँवों में घर बनाने के लिए बजट में डेढ़ गुना बढ़ोत्तरी की गई। पिछले साल इस यांजना के लिए 4000 हजार करोड़ रुपये दिये गए थे, जिसे इस बार बढ़ाकर 6000 करोड़ कर दिया गया है। राष्ट्री स्वास्थ्य मिशन को 21,239 करोड़ रुपये जारी किए गये हैं। यह योजना अब शहरों में भी शुरू की जाएगी।

वित्त मंत्री ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। इसके तहत 2 लाख तक की आय में कोई टैक्स नहीं लगेगा, 2 से 5 लाख तक 10 प्रतिशत, 5 से 10 लाख तक 20 फीसदी और 10 लाख से अधिक पर 30                प्रतिशत टैक्स निर्धारित है।  साथ ही महिलाओं के लिए अलग बैंक बनाने की बात कही गई है। बैंक तो खोल दिए गए पर इनकी आय कैसे बढ़े इस पर सरकार का ध्यान नहीं गया। रक्षा क्षेत्र के लिए बजट में पिछले साल के मुकाबले 14 फीसदी की बढ़ोत्तरी करके 2 लाख 3 हजार 6 सौ 72 करोड़ का आवंटन किया गया है।

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